पेट्रोलॉजी प्रयोगशाला

पेट्रोलॉजी ऐसी शाखा है जिसमे आग्नेय, सेडीमेंटरी एवं मेटामॉर्फिक चट्टान के पेट्रोग्राफिक एवं पेट्रोजेनेटिक अध्ययन किए जाते हैं।

पेट्रोलॉजी प्रयोगशाला में मेगास्कोपिक एवं माइक्रोस्कोपिक चट्टानों की विशेषताओं के नमूनों पर अध्ययन किया जाता है। इसके साथ ही इस प्रयोगशाला में रिफ्लेक्टेड लाइट माइक्रोस्कोप के अंतर्गत धातु एवं गैर-धातु खनिज का अध्ययन भी किया जाता है।

खनिज अन्वेषण में पेट्रोलॉजी की भूमिका

  • अनेक बार फील्ड पर कार्य करते वक्त चट्टानों की खनिजो की उपलब्धता का पता लगा पाना सुगम तथा व्यवहारात्मक नहीं होता है। क्योंकि हस्त प्रतिरूप अध्ययन सिर्फ खनिज की भौतिक विशेषताओं जैसे रंग, खनिज का संयोजन, अनुभेदन, सख्ती आदि का अध्ययन करता है जिसके कारणवश चट्टानों की पहचान एवं वर्गीकरण कर पाना यथेष्ट नही होता।
  • पेट्रोलॉजी प्रयोगशाला, में खनिजों की ऑप्टिकल विशेषताओं एवं उनके संयोजन का अध्ययन कर चट्टान का नाम दिया जाता है।
  • अयस्क खनिजों की पहचान अन्वेषण का प्रथम एवं प्रमुख पहलू है पर अधिकांश बार यह इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हे पहचान पाना मुश्किल हो जाता है, अतः इन्हे माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है।
  •  चट्टान के नाम को सुनिश्चित करना एवं अयस्क की पहचान करना अतिआवश्यक होता है क्योंकि वह भूवैज्ञानिकों को भविष्य में अन्वेषण के कार्यों हेतु सहायक साबित होता है।

सेक्शन कटिंग प्रयोगशाला

सेक्शन कटिंग प्रयोगशाला में चट्टानों एवं खनिजों के नमूनों को तैयार किया जाता है क्षीण सेक्शन के तौर पर एवं पॉलिश्ड सेक्शन के रूप में जिससे इनका पेट्रोलॉजी प्रयोगशाला में अध्ययन किया जा सके।

प्रयोगशाला में प्रयोग में लाए जाने वाले उपकरण निम्न प्रकार हैं:

स्टीरियो माइक्रोस्कोप

स्टीरियो  माइक्रोस्कोप का  इस्तेमाल चट्टानों एवं खनिजों के पॉलिश्ड सेक्शन के आवर्धन अवलोकन हेतु इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही यह सामूहिक रूप से प्रत्येक अव्ययव के अध्ययन के लिए भी उपयोगी होता है, जिसके परिणामस्वरूप अपेक्षित अव्ययव को समूह से अलग कर आगे के कार्य हेतु प्रयोग किया जा सकता है जिससे पॉलिश सेक्शन आदि कार्य को किया जा सके।

लाइका डीएमएलपी ध्रुवीकरण माइक्रोस्कोप

यह ऑप्टिकल माइक्रोस्कोप रिफ्रैक्टेड लाइट (पेट्रोग्राफिक अध्ययन हेतु) एवं साथ ही रिफ्लेक्टेड लाइट (अयस्क माइक्रोस्कोपिक अध्ययन) के तहत चट्टान के क्षीण भाग के अध्ययन हेतु इस्तेमाल किया जाता है। यह मुख्य रूप से अयस्क खनिज हेतु इस्तेमाल किया जाता है एवं आर्थिक पहलुओं हेतु महत्वपूर्ण होता है।

लाइका डीएमईपी रिफ्रैक्टेड माइक्रोस्कोप

ऑप्टिकल माइक्रोस्कोप का प्रमुख सिद्धांत यह है कि अधिकांश खनिज (अपारदर्शी के अतिरिक्त) यदि उन्हें 0.03 मिमी में काटा जाए, तो वे प्रकाश संचारित करते हैं तथा अन्य आप्टिकल विशेषताओं जैसे रंग, प्लियोक्रोइज़्म, रिलीफ़, प्रकार, दरार, चमक इत्यादि को प्रदर्शित करते है जिन्हें पेट्रोग्राफिक माइक्रोस्कोप (रिफ्रेक्टेड लाइट माइक्रोस्कोप) की मदद से देखा जा सकता है | इस तकनीक के प्रयोग से खनिजों व पत्थरों के पहचान व प्रकार निर्धारण में बहुत सहायता मिलती है |