भूमिका और कार्य

भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय, उत्तर प्रदेश की भूमिका

भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय द्वारा सर्वेक्षण एवं  खनिजो के सिद्धिकरण के कार्य को निष्पादित किया जाता है। इसके अतिरिक्त खनन पट्टा आवेदनों, निरीक्षण  खनन क्षेत्रों का सीमांकन, खनिज राजस्व का अनुश्रवण का कार्य करता है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में खनिज विकास हेतु निदेशालय द्वारा राज्य सरकार को परामर्श भी प्रदान करने के साथ निम्नलिखित कार्यो का सम्पादन किया जाता है:

  • खनिज अन्वेषण कार्यो को गति प्रदान करना एवं निजी क्षेत्र में ऐसी गतिविधि को बढ़ावा देना जिससे नए खनिज भण्डारणों (वनीय़ क्षेत्रों में भी मौजूद) की खोज की जा सके।
  • संबंधित क्षेत्रों में उद्यमियों हेतु प्रायोजित अन्वेषण को अनुसूचित दर पर परामर्श एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना।
  • खनिज विकास को बढ़ावा देना।
  • खनिज संबंधित डाटा को एकत्र, विश्लेषण, अनुपालन एवं कंप्यूटरीकृत करना एवं उसे उद्यमियों के लिए उपलब्ध कराना।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा एवं खनिज उपयोग के साथ वैज्ञानिक खनन हेतु उद्यमियों को तकनीकी जानकारी प्रदान कराना एवं सुविधाएं मुहैया कराना।
  • निर्धारित दर पर उद्यमियों को प्रयोगशाला एवं परीक्षण सुविधाएं प्रदान करना।
  • खनन / परिवहन नियमो का परिपालन कराना
  • खनन गतिविधियो संचालनों का अनुश्रवण खनन क्षेत्रों का पुनर्विचार, कर्मियों की सुरक्षा एवं सुविधा को सुनिश्चित करना।
  • प्रवर्तन कार्यो का अनुश्रवण रॉयल्टी को एकत्र करना व खनन / परिवहन की निगरानी करना।
  • खनन प्रशासन प्रणाली को सुदृढ़ बनाना।

उक्त कार्यों के अतिरिक्त, भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय, द्वारा एक विशेष प्रकार के प्रकोष्ठ का सृजन किया गया है, जिसके अंतर्गत निम्न भूतत्व एवं खनिकर्म कार्यों को निष्पादित किया जा सके। आवश्यकतानुसार यह प्रकोष्ठ अन्य सहायता भी प्रदान करेगा।

  • पूंजी निवेश के उद्देश्य से उपलब्ध सूचना का विश्लेषण कर खनिज के विकास को बढ़ावा देना।
  • संचालित खानों में स्थायी गुणवत्ता नियंत्रण का रखरखाव करने में सहायता प्रदान करना।
  • तकनीक के आयात हेतु बाहरी सहयोग प्राप्त करने में सहायता प्रदान करना।
  • खनिज आधारित परियोजनाओं हेतु टेक्नो-आर्थिक व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करना एवं परियोजना समीक्षा एवं क्लियरेंस में सरकारी अभिकरणों एवं वित्तीय संस्थाओं को सहायता प्रदान करना।
  • व्यापार विकास एवं अनुसंधान को बढ़ावा देना एवं निर्धारित/रणनीतिक क्षेत्रों में खनिज संपदा को स्थापित करने में सहयोग प्रदान करना।
  • खनिज प्रसंस्करण इकाइयों को स्थापित करने में सहायता प्रदान करना।
  • गोष्ठी, प्रदर्शनी का आयोजन करना एवं खनिज विकास को बढ़ावा देने हेतु साहित्य प्रकाशित करना।
  • भूविज्ञान व भूरसायन से सम्बन्धित प्रशिक्षण कराना