रिमोट सेंसिंग प्रयोगशाला

रिमोट सेंसिंग

  • फोटोजियोलॉजी एवं रिमोट सेंसिंग ऐसा अध्ययन है जिसमे किसी वस्तु/क्षेत्र की सूचना वायुयान / उपग्रह से प्राप्त डाटा के विश्लेषण के आधार पर की जा सकती है जो संबंधित वस्तु/क्षेत्र से असंबद्ध है।
  • उपग्रह से प्राप्त डाटा को पहचान जैसे टोन, रंग, आकार, प्रकार, संबद्ध एवं छाया के माध्यम से समझा जा सकता है।
  • प्राकृतिक रिमोट सेंसिंग का बेहतरीन उदाहरण मानव नेत्र हैं क्योंकि मानव नेत्र इलेक्ट्रोमैगनेटिक रेडिएशन (प्रत्यक्ष रोशनी) का केवल एक हिस्सा देख पाता है जो बाहरी वस्तु को प्रतिबिंबित करता है। अक्षिपटल पर एकत्रित हुई सूचना सीधे मस्तिष्क में जाती है जो जहां इन संकेतों को मनोवैज्ञानिक रूप से एक प्रोसेस के अधीन एक पूर्ण चित्र के रूप में परिवर्तित किया जाता है |
सुदूर संवेदन में डाटा प्राप्त करने की प्रक्रिया

भौगोलिक सूचना तंत्र (जीआईएस)

जीआईएस एक कम्प्यूटरीकृत डाटा तंत्र है जो डाटा कैप्चरिंग, इंपुट, हस्तकौशल, परिवर्तन, प्रत्यक्षीकरण, संयुक्तता, प्रश्न, विश्लेषण, मॉडलिंग एवं आउटपुट देने हेतु सक्षम होता है एवं इसकी अभिकल्पना वर्तमान स्थानिक अथवा भूगौलिक डाटा को कैप्चर, भण्डारण, हस्तकौशल, विश्लषण, प्रबंधन करने हेतु की गयी है। जीआईएस तकनीक डिजिटल सूचना का प्रयोग करता है जिसके लिए विभिन्न डिजिटाइज्ड डाटा सृजन की विधि का इस्तेमाल किया जाता है। डाटा सृजन की सर्वाधिक सामान्य विधि डिजिटाइजेशन है, जहां डिजिटल माध्यम में हार्ड कॉपी मानचित्र अथवा सर्वेक्षण प्लान हस्तांतरित किया जाता है।

भौगोलिक सूचना तंत्र (जीआईएस)

खनिज अन्वेषण में रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस की भूमिका

  • धरती की उचित, संक्षिप्त एवं बर्ड आई दृश्य आकाशीय छवियों एवं उपगृही तस्वीरें प्राप्त होती हैं एवं जिसके परिणामस्वरूप धरती के संसाधनों के अध्ययन में सहायता प्राप्त होती है।
  • एक एकल उपग्रह तस्वीर में लगभग 700 वर्ग किमी क्षेत्र के भू-तल के प्रत्यक्ष अवलोकन को सक्षम बनाता है जिसके परिणामस्वरूप चट्टान के प्रकार, जियोमॉर्फिक एवं ढांचा विशेषताएं जैसे फोल्ड, क्षति, टोन, रंग, बुनावट, आकार एवं संबद्ध के विस्तृत अध्ययन में सहायता प्राप्त होती है |
  • रिमोट सेन्सिंग से प्राप्त आंकड़े समझने में काफी दुष्कर होते हैं क्योकि इनसे उन स्थानों की सूचना भी एकत्र की जा सकती है जो भौगोलिक रूप से दुर्गम भी हैं | इसके अतिरिक्त किसी बड़े क्षेत्र में स्थित खनिज संपदा संबन्धित आंकड़े कई बार भी जुटाए जा सकते हैं |
  • उक्त विवरण के आधार पर विशाल क्षेत्र के स्थानीय, भौगोलिक, जियोमॉर्फोलॉजिकल एवं टेक्टॉनिक मानचित्र को बहुत ही कम समय में तैयार किया जाता है।
  • इन मानचित्रों द्वारा खनिज संपदा के खनिज लक्ष्य एवं निकट स्रोत हेतु विस्तृत जांच हेतु उपयुक्त जानकारी प्राप्त होती है।